इटावा रेलवे स्टेशन पर सनसनीखेज मामला, नकली आईडी, यूनिफॉर्म, झंडियां और लॉगबुक भी बरामद
इटावा। कालका एक्सप्रेस (हावड़ा-कालका रूट) के इंजन में बैठे एक युवक को जीआरपी और रेलवे कर्मियों ने पकड़ लिया, जो खुद को लोको पायलट (ट्रेन ड्राइवर) बताकर इंजन में सवार था। उसकी हरकतों पर असली लोको पायलट को शक हुआ और पूछताछ करने पर यह बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ।
📌 घटना कैसे हुई
सोमवार को कालका एक्सप्रेस के इटावा स्टेशन पहुंचने पर ट्रेन के चालक ने देखा कि इंजन में पहले से एक अंजान युवक बैठा है, जो लोको पायलट की वर्दी और गले में आईडी कार्ड पहने हुए था। उसके हाथ में ट्रेन चलाने के लिए प्रयोग होने वाली लाल-हरी झंडी भी थी।
युवक के आत्मविश्वास और वर्दी के कारण पहले किसी को शक नहीं हुआ। लेकिन जब असली लोको पायलट ने उससे ट्रेन के नंबर और तकनीकी सवाल पूछे तो वह हड़बड़ा गया। तुरंत जीआरपी को बुलाया गया और युवक को हिरासत में ले लिया गया।

📝 गिरफ्तार युवक की पहचान
जीआरपी ने बताया कि पकड़े गए युवक का नाम आकाश कुमार (निवासी कौसल्या नगर, फिरोजाबाद) है। वह केवल दसवीं कक्षा तक पढ़ा है। पिछले दो वर्षों से वह खुद को लोको पायलट बताकर अलग-अलग ट्रेनों के इंजनों में सफर कर रहा था।
उसके पास से लोको पायलट की नकली यूनिफॉर्म, एक फर्जी आईडी कार्ड, नेमप्लेट, लाल-हरी झंडी और एक लॉगबुक बरामद हुई।
💬 युवक का कबूलनामा
पूछताछ में आकाश ने बताया कि वह ट्रेन का किराया बचाने के लिए यह सब करता था। नकली वर्दी और पहचान-पत्र पहनकर इंजन में चढ़ जाता और मुफ्त में सफर करता।
उसने कहा कि इस तरीके से वह न सिर्फ एक्सप्रेस, बल्कि पैसेंजर ट्रेनों में भी लगातार सफर करता रहा और किसी ने उस पर शक नहीं किया।
🚨 रेलवे सुरक्षा पर खतरे की घंटी
रेलवे सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सिर्फ किराया बचाने की चाल नहीं हो सकती।
युवक के पास लॉगबुक और झंडियां मिलना इस बात का संकेत है कि वह ट्रेन संचालन की प्रक्रियाओं को भी समझता था।
यदि वह गलती से भी ट्रेन के उपकरणों से छेड़छाड़ कर देता या इंजन चलाने की कोशिश करता तो हजारों यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती थी।
यह भी आशंका है कि किसी संगठित गिरोह ने उसे वर्दी और आईडी उपलब्ध कराई हो।
👮 जांच और आगे की कार्रवाई
जीआरपी अधिकारियों के मुताबिक आकाश को जेल भेज दिया गया है। अब यह जांच की जा रही है कि उसके पीछे कोई गिरोह है या वह अकेले यह काम करता था।
रेलवे सुरक्षा बल और इंटेलिजेंस यूनिट वर्दियों और आईडी कार्ड के स्रोत तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
📝 नियम और दंड
रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 146 व 147 के तहत रेलवे स्टाफ की नकली वर्दी या पहचान-पत्र का उपयोग करना दंडनीय अपराध है। इसमें जुर्माना और जेल दोनों की सजा हो सकती है।


