आतंकवाद की जड़ पर प्रहार — एक ठोस वैश्विक और भारतीय ब्लूप्रिंट

लखनऊ, 12 नवम्बर 2025 — आतंकवाद अब किसी एक देश या विचारधारा की समस्या नहीं रह गया है। यह असमानता, धार्मिक कट्टरता, राजनीतिक अस्थिरता और वैश्विक शक्ति-संतुलन के टूटने का…

स्वच्छ हवा का हक: जीवन के अधिकार की नई परिभाषा

हम जिस हवा में साँस लेते हैं, वही अब सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की लगभग 99% आबादी…

पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट का रुख: परंपरा और पर्यावरण के बीच संतुलन की पुकार

पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट: दीपावली का त्यौहार नजदीक आते ही एक पुराना सवाल फिर लौट आया है — क्या रोशनी का पर्व बिना पटाखों के अधूरा है, या अब वक्त…

विशाखापत्तनम बनेगा भारत का AI केंद्र: गूगल का 15 बिलियन डॉलर निवेश, सुन्दर पिचाई और पीएम मोदी के बीच संवाद

भारत का AI केंद्र: भारत जल्द ही दुनिया के प्रमुख कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) केंद्रों में से एक बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। अमेरिकी टेक दिग्गज गूगल ने…

राम मनोहर लोहिया: सामाजिक चेतना का शिल्पकार

12 अक्टूबर 1967 को नई दिल्ली में 57 वर्ष की आयु में लोहिया का देहांत हुआ था। इसे आज उनकी पुण्यतिथि के रूप में याद किया जाता है — वह…

जयप्रकाश नारायण: लोकतंत्र की आत्मा और आज के भारत की चेतना

जयप्रकाश नारायण:जब भारत में राजनीति का अर्थ केवल सत्ता-संघर्ष तक सीमित हो गया है, तब जयप्रकाश नारायण का नाम हमें याद दिलाता है कि राजनीति का सबसे ऊँचा उद्देश्य समाज…

धरती पुत्र की विरासत: मुलायम सिंह से अखिलेश तक समाजवाद की बदलती परिभाषा”

मुलायम सिंह: उत्तर प्रदेश की राजनीति में “धरती पुत्र” कहे जाने वाले मुलायम सिंह यादव का नाम केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक युग का प्रतीक रहा है — वह…

भगत सिंह: श्रद्धा से विचार तक — संघ और भाजपा की दृष्टि से बलिदान का अर्थ

भगत सिंह: जब गोरे अंग्रेज़ चले जाएंगे, तो क्या काले अंग्रेज़ राज नहीं करेंगे?”— भगत सिंह का यह सवाल आज भी समय के पार गूंजता है। यह सवाल केवल औपनिवेशिक…

साम्प्रदायिक हिंसा: जब नफ़रत के नाम पर जलता है इंसानियत का घर

नई दिल्ली। भारत जैसे बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक देश में जब साम्प्रदायिक हिंसा भड़कती है, तो केवल घर या दुकानें नहीं जलतीं — समाज की आत्मा झुलस जाती है। धर्म के…

भारतीय ज्ञान परंपरा : ह्रास, वर्तमान संकट और भविष्य की राह

भारत को प्राचीन काल से ही “ज्ञानभूमि” कहा गया है। यहाँ वेद, उपनिषद, महाभारत, रामायण जैसे महाकाव्यों से लेकर आयुर्वेद, ज्योतिष, योग, गणित, वास्तु और दर्शन तक अनेक शाखाएँ विकसित…