उन्नाव। गंगा नदी के उफान से कटरी और तटीय इलाकों में फैली बाढ़ ने ग्रामीणों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न हैं, कई घर पानी से घिरे हैं और सैकड़ों परिवारों को अपने ही गांवों में अस्थायी ठिकानों पर दिन काटने पड़ रहे हैं। ऐसे कठिन समय में प्रशासन और जनप्रतिनिधि लगातार राहत कार्य में जुटे हुए हैं।
सोमवार को सफीपुर क्षेत्र के विधायक बम्बालाल दिवाकर और उप जिलाधिकारी सफीपुर ने संयुक्त रूप से बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया। उन्होंने जमालनगर राहत केंद्र पर आयोजित वितरण कार्यक्रम में माढ़ापुर, लोनारी, शेरपुर, मनियापुर व जमालनगर समेत आसपास के गांवों के करीब 350 परिवारों को राशन किट प्रदान की। इन किटों में आटा, चावल, दाल, तेल, नमक, मसाले और अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री शामिल रही।

विधायक दिवाकर ने इस मौके पर कहा – “सरकार हर आपदा पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। प्रशासन की प्राथमिकता है कि कोई भी परिवार भूखा न रहे और हर जरूरतमंद तक समय पर मदद पहुंचे।”
इसी प्रकार, तहसील बांगरमऊ क्षेत्र में भी राहत सामग्री वितरण का बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां विधायक कांत कटियार ने राजस्व विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में माना नगर, मजरा जाजमऊ, उमरपुर, पीतमपुर, हरदासपुर और फरीदपुर ग्राम पंचायतों के राहत केंद्रों पर पहुंचकर लगभग 500 बाढ़ पीड़ित परिवारों को राशन किट बांटीं।
विधायक कटियार ने पीड़ितों को आश्वस्त किया कि राहत वितरण लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा – “राज्य सरकार और प्रशासन मिलकर हर गांव तक सहायता पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। किसी भी पीड़ित को परेशान होने की जरूरत नहीं है।”
प्रशासनिक प्रयास और आगे की योजना
राहत वितरण के दौरान राजस्व विभाग और तहसील प्रशासन की टीमें मौजूद रहीं। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित गांवों का सर्वे कार्य तेजी से चल रहा है। जिन परिवारों तक अभी मदद नहीं पहुंच पाई है, उनकी सूची तैयार की जा रही है और जल्द ही उन्हें भी राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
साथ ही, स्वास्थ्य विभाग ने भी प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा टीमें तैनात की हैं ताकि जलजनित रोगों पर नियंत्रण रखा जा सके। ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए टैंकरों की व्यवस्था की जा रही है।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया
राहत सामग्री पाकर पीड़ित परिवारों ने राहत की सांस ली। ग्रामीणों ने कहा कि पिछले कई दिनों से बाढ़ के कारण जीवन मुश्किल में था, लेकिन अब सरकार और प्रशासन की मदद से उन्हें भोजन और जरूरी सामग्री मिल रही है। कई ग्रामीणों ने मांग की कि पशुओं के लिए चारा व चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं, क्योंकि बाढ़ से उनके मवेशी भी प्रभावित हुए हैं।







