शुक्लागंज: गंगाघाट क्षेत्र के सरोज सरस्वती विधा मंदिर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विजय दशमी पर्व के अवसर पर भव्य पथ संचलन निकाला गया। यह आयोजन शक्ति उपासना के दिनों में सत्य की असत्य पर और धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत विधि-विधानपूर्वक की गई। मंदिर में रोली, अक्षत और पुष्प से पूजन किया गया और दीप प्रज्ज्वलन के साथ शस्त्र पूजन एवं दंड पूजन सम्पन्न हुआ। इसके बाद स्वयंसेवकों ने पूर्ण अनुशासन और सुव्यवस्थित रूप में पथ संचलन आरंभ किया।
पथ संचलन का मार्ग और आयोजन:
पथ संचलन सरोज सरस्वती विधा मंदिर से शुरू होकर राजधानी मार्ग, अम्बिका पुरम बस्ती, गायत्री नगर बस्ती, आदर्श नगर, कंचन नगर होते हुए पुनः राजधानी मार्ग से वापस मंदिर तक पहुँचा। रास्ते में के डी त्रिवेदी जी समेत कई घरों से पुष्प वर्षा की गई। यह दर्शाता है कि समाज में पथ संचलन के महत्व और संघ के उद्देश्य की समझ कितनी गहरी है।
पथ संचलन का महत्व:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संदर्भ में पथ संचलन एक अनुशासनात्मक और सामूहिक गतिविधि है। स्वयंसेवक एक निर्धारित मार्ग पर एक साथ चलते हैं, जो अनुशासन, एकता और सामूहिकता की भावना को बढ़ावा देता है। इस दौरान स्वयंसेवक गणवेश में रहते हैं और एक विशेष लय और गति में चलते हैं। पथ संचलन का उद्देश्य संघ के संघर्ष, निरंतरता और राष्ट्रप्रेम की भावना को जन-जन तक पहुँचाना है।
विश्राम और समापन:
मार्ग में कुछ समय विश्राम के लिए ठहराव किया गया। वहां स्वयंसेवकों और अतिथियों को जलपान कराया गया। इसके बाद नगर संचालक अंजनी कुमार, सह नगर संचालक राकेश कुमार, विभाग प्रचारक अमरजीत, प्रांत सेवा प्रमुख तेजभान, जिला सह शारीरिक शिक्षण प्रमुख कृष्ण प्रताप, जिला सह व्यवस्था प्रमुख विजय सिंह, जिला प्रचार प्रमुख विट्ठल गोस्वामी सहित नीरज, सुनील, शिवम, सचिन, आकाश, वेदांत आदि की देखरेख में कार्यक्रम का समापन किया गया।
इस आयोजन के माध्यम से संघ ने अपने 100 वर्षों के संघर्ष और निरंतरता को याद किया और राष्ट्रप्रेम, अनुशासन एवं चरित्र निर्माण के संदेश को समाज में फैलाने का प्रयास किया।







