आज (06 अक्टूबर 2025) शरद पूर्णिमा का पावन पर्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। इसे कोजागरी पूर्णिमा, रास पूर्णिमा और कुमार पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास किया था। इसी कारण यह रात्रि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
📜 शरद पूर्णिमा का महत्व
मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में अमृत-तत्व बरसता है। इसलिए इस दिन चंद्रमा की पूजा कर खीर/मिष्ठान को चांदनी में रखने का विशेष महत्व है।
इसे धन, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि देने वाला पर्व माना जाता है।
इस दिन माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागरण करने वालों को आशीर्वाद देती हैं। इसी कारण इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है (अर्थात्—कौन जाग रहा है?)।
कई जगह इस दिन पारंपरिक व्रत और जागरण करने की भी परंपरा है।
वैद्यकीय दृष्टि से भी माना जाता है कि इस दिन रात में रखी खीर में स्वास्थ्यवर्धक गुण आ जाते हैं।
🙏 पूजन-विधि (स्टेप-बाय-स्टेप)
1. सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें।
2. माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु/श्रीकृष्ण की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर पूजा करें।
3. धूप, दीप, पुष्प, नैवेद्य, मिठाई और जल अर्पित करें।
4. रात को खीर (दूध-चावल की) बनाकर चांदी/मिट्टी/स्टील के पात्र में रखें।
5. खीर को चंद्रमा की रोशनी में पूरी रात रखने के बाद अगले दिन परिवार व भक्तों में वितरित करें।
6. रात को जागरण करें, भजन-कीर्तन करें और माता लक्ष्मी का ध्यान करें।
7. आर्थिक समृद्धि की कामना से विशेष रूप से लक्ष्मी पूजन करें।
8. जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, मिठाई आदि का दान करने का भी महत्व है।
🌟 क्या करें और क्या न करें
इस दिन घर में सात्विक भोजन करें।
मांस, शराब और तामसिक आहार से परहेज़ करें।
रात को अधिक से अधिक समय तक जागकर मंत्र-जप, भजन या धार्मिक कार्य करें।
खीर को चंद्रमा की रोशनी में ढककर ही रखें (कपड़े से)।
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📌 संक्षेप में
शरद पूर्णिमा धन, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक पर्व है। श्रद्धा और विधिपूर्वक पूजा करने से माता लक्ष्मी की कृपा और चंद्रदेव का आशीर्वाद मिलता है।


