हरिओम गुप्ता/उन्नाव thenews80
उन्नाव। देश को झकझोर देने वाले उन्नाव दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने सेंगर की उम्रकैद की सजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया है, जिससे उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि अदालत ने रिहाई को लेकर कड़ी और स्पष्ट शर्तें तय की हैं, ताकि पीड़िता की सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।
⚖️ हाईकोर्ट का आदेश: 15 लाख का मुचलका
दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर की अपील पर सुनवाई करते हुए उन्हें 15 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानतें दाखिल करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि अपील पर अंतिम फैसला आने तक उन्हें सशर्त रिहाई दी जा सकती है।
🚨 इन 5 सख्त शर्तों पर मिली राहत
अदालत ने रिहाई के साथ सेंगर के लिए कई ‘लक्ष्मण रेखाएं’ खींची हैं—
1️⃣ पीड़िता से दूरी – पीड़िता के निवास स्थान या उसके 5 किमी के दायरे में प्रवेश नहीं कर सकेंगे।
2️⃣ दिल्ली में ही रहना होगा – दिल्ली से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी।
3️⃣ पासपोर्ट जमा – देश छोड़ने पर पूरी तरह रोक।
4️⃣ साप्ताहिक हाजिरी – हर सोमवार स्थानीय थाने में उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
5️⃣ गवाहों को प्रभावित किया तो जमानत रद्द – किसी भी उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई होगी।
🧑⚖️ निचली अदालत ने दी थी ‘मौत तक उम्रकैद’
साल 2017 के इस जघन्य मामले में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने वर्ष 2019 में कुलदीप सेंगर को दोषी ठहराते हुए मौत तक उम्रकैद की सजा सुनाई थी। साथ ही 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
❗ फैसले के बाद सुरक्षा पर बहस
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद एक बार फिर पीड़िता की सुरक्षा और न्याय को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सामाजिक संगठनों का कहना है कि उन्नाव कांड में पीड़िता और उसके परिवार ने भारी कीमत चुकाई है—कई परिजनों की मौत और वर्षों की कानूनी लड़ाई। ऐसे में सेंगर की रिहाई मानसिक दबाव और सुरक्षा चुनौती बढ़ा सकती है।
🏛️ सियासी गलियारों में हलचल
कभी यूपी की राजनीति में प्रभावशाली चेहरा रहे कुलदीप सेंगर को इस कांड के बाद भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था और उनकी विधायकी भी रद्द हो चुकी है। जेल से बाहर आने की खबर ने राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज कर दी हैं, हालांकि कोर्ट की शर्तों के चलते वे फिलहाल उन्नाव और सक्रिय राजनीति से दूर रहेंगे।



