✒️गंगा सागर चतुर्वेदी
शुक्लागंज। आज पितृपक्ष का दूसरा दिन गंगा के घाटों पर सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ गंगा तटो पर उमड़ी और अपने पूर्वजों और पितृ देवो को जल देने को पंक्तिबद्ध गंगा के जल में बैठ कर भक्तिभाव से सराबोर अक्षत, तिल, पुष्प अंजुली में भर कर कुश की पवित्री दाहिने हाथ की अनामिका में धारण कर नवीन अंगवस्त्र कंधे पर रखकर पूर्वजों का आह्वान करते नजर आये पूंछने पर श्रद्धालुओं का जवाब भी विचारणीय था तर्पण पश्चात श्रद्धांलुओं द्धारा सहज भाव से अपने पूर्वजों के प्रति कर्तब्य बोध के साथ बताया गया की परलोक गमन की तिथियों के अनुसार तर्पण प्रारम्भ और श्राद्ध के साथ परायण होता है। और ऐसा संयोग सौ वर्षो बाद आया है। की इस वर्ष पितृपक्ष का प्रारम्भ चन्द्रग्रहण के साथ और परायण सूर्यग्रहण के साथ होगा जो विशेष योग बनाते है तो इस वर्ष अधिक से अधिक लोगो को अपने सगे सम्बन्धियों का तर्पण एंव श्राद्ध कर पितृ ऋण से उऋण होना चाहिए ऐसी मान्यता है। की पितृ दोष के कारण ही हम स्वस्थ मन मस्तिष्क से अच्छे निर्णय में असमर्थ होते है जिसके कारण बनते हुए कार्य बिगड जाते है। घर में क्लेश और बीमारियों की समस्या भी बनी रहती है जिसके निवारण हेतु शास्त्रमत के अनुसार योग्य पुरोहित के परामर्श से पितृदोष दूर करने के लिये श्राद्ध और तर्पण करना चाहिए ततपश्चात् सामर्थ अनुसार दान दक्षिणा देकर पुण्य अर्जित करना चाहिए तर्पण और श्राद्ध में प्रयोग होने वाले खाद्य पदार्थो को तीन भागो में विभाजित कर गाय, कुत्ता, और कौवे का भाग निकाल दिया जाता है और उन्हें बहुत श्रद्धा भाव से भोजन के रूप में समर्पित कर दिया जाता जिससे हमारे पर्यावरण का संरक्षण भी होता है जो अगले अंक में विस्तृत रूप से बताया जायेगा लेकिन आज का विषय विशेष योग पितृ पक्ष में कई विशेष योग बन रहे हैं, जो पितरों के लिए दान, श्राद्ध और तर्पण करने के लिए शुभ माने जाते हैं। इन योगों में किए गए कार्यों से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
विशेष योग:
सर्वार्थ सिद्धि योग: यह योग 9 सितंबर को सुबह 6:04 बजे से शाम 6:07 बजे तक रहेगा। इस योग में किए गए कार्य सफल होते हैं और व्यक्ति को सफलता प्राप्त करने में मदद मिलती है।- *अमृत सिद्धि योग*: यह योग 27 और 30 सितंबर को रहेगा। इस योग में किए गए कार्यों में सफलता हासिल होती है और यह मांगलिक कार्यों के लिए बेहद शुभ संयोग है।
रवि योग: यह योग 26 और 27 सितंबर को रहेगा। इस योग को बेहद प्रभावशाली माना जाता है और इसे शुभ फलदायी माना जाता है।
श्राद्ध और तर्पण के लिए शुभ मुहूर्त:
प्रतिपदा श्राद्ध: 8 सितंबर 2025 (आज)
द्वितीया श्राद्ध: 9 सितंबर 2025
तृतीया श्राद्ध: 10 सितंबर 2025
और अधिक जानकारी के लिए आप पंडित या ज्योतिषी से संपर्क कर सकते हैं।
तर्पण करने की सरल विधि: तर्पण शुरू करने से पहले एक कुशा की अंगूठी बनाएं।
तर्पण करने वाले व्यक्ति का मुख दक्षिण दिशा में होना चाहिए।
तर्पण में काले तिल, सफेद चंदन, सफेद फूल का प्रयोग करें।
लोटे में थोड़ा गंगाजल, सादा जल और दूध लेकर उसमें बूरा जौ और काले तिल डालें।
कुशी की जूड़ी पर 108 बार जल चढ़ाएं और मंत्रों का उच्चारण करें.¹







