उन्नाव। शुक्लागंज नगर पालिका क्षेत्र के राजीव नगर वार्ड में बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच राहत सामग्री वितरण को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। गंगा की बाढ़ का प्रकोप झेल रहे इस इलाके में करीब डेढ़ महीने से 200 परिवार संकट में हैं, लेकिन उन्हें अब तक सरकारी राहत सामग्री नहीं मिल पाई है।
लोगों का दर्द – ‘हमारे हिस्से का राशन दबा लिया गया’
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहा है।
“जब से बाढ़ आई है हम झोपड़ी और अस्थाई शरण में रह रहे हैं। बच्चे भूखे पेट सो रहे हैं, लेकिन सभासद प्रतिनिधि हमारे हिस्से का राशन दबा लिए हैं। सिर्फ अपने परिचितों को फायदा पहुंचा रहे हैं।” – एक महिला पीड़ित ने रोते हुए बताया।
“लेखपाल और सभासद ने मिलकर बाढ़ पीड़ितों का हक़ छीन लिया है। अगर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो हम सब सड़क पर उतरेंगे।” – एक बुज़ुर्ग पीड़ित ने कहा।
सभासद प्रतिनिधि परवेज आलम पर गंभीर आरोप
लोगों का आरोप है कि परवेज आलम, जो वार्ड के सभासद प्रतिनिधि हैं, केवल अपने करीबी लोगों को राहत दे रहे हैं। उनके घर पर राहत सामग्री की किटें जमा हैं और उन्हें मनमाने ढंग से बांटा जा रहा है।
लेखपाल की भूमिका पर सवाल
पीड़ितों ने लेखपाल पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि लेखपाल की मिलीभगत से सामग्री का गलत वितरण हो रहा है। सरकारी गाइडलाइन और पात्रता सूची को नज़रअंदाज़ कर कुछ चुनिंदा लोगों को ही लाभ दिया जा रहा है।
योगी सरकार की छवि पर असर
प्रदेश सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि किसी भी बाढ़ पीड़ित को मदद से वंचित नहीं किया जाएगा। लेकिन राजीव नगर का मामला सरकार की छवि पर सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री की मंशा को ज़मीनी स्तर पर अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि पलीता लगा रहे हैं।
एसडीएम के आदेश भी ठंडे बस्ते में
हाल ही में एसडीएम सदर ने मौके पर जाकर जांच की थी और स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सभी पात्र परिवारों को तुरंत राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए। मगर आरोप है कि उस आदेश का पालन अब तक नहीं हुआ और पीड़ित परिवार निराश लौटते रहे।
पीड़ितों की चेतावनी
लोगों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निष्पक्ष जांच कर राहत सामग्री नहीं दी गई, तो वे सामूहिक रूप से धरना-प्रदर्शन करेंगे और बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।







