शुक्लागंज। नवरात्रि के आठवें दिन, जिसे अष्टमी कहा जाता है, मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालु प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करते हुए पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र कर तैयार हुए।
मां की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप प्रज्वलित किए गए, धूप, पुष्प, अक्षत और नैवेद्य अर्पित किया गया। भक्त श्रद्धा भाव से मां कालरात्रि का ध्यान कर उनके मंत्रों का जाप करते हैं। मान्यता है कि इस दिन की पूजा करने से भय, रोग, शत्रुओं और सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

मंदिर में धार्मिक उत्सव
राजधानी मार्ग स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाएं और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में मां के दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर परिसर में भजन, कीर्तन और मंत्र-जप की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने आरती में भाग लिया और मां से आशीर्वाद लिया।
मां कालरात्रि का महत्व
मां कालरात्रि का स्वरूप भयकारी होते हुए भी भक्तों के लिए अत्यंत कृपालु माना जाता है। उन्हें काला वस्त्र और अश्वेत रूप धारण किए हुए दर्शाया जाता है। मान्यता है कि उनके पूजन से नकारात्मक शक्तियां नष्ट होती हैं और जीवन में साहस व आत्मबल की वृद्धि होती है।
विशेष भोग और प्रसाद
पूजा के बाद मंदिर में विशेष भोग का आयोजन किया गया। फल, मिठाई, सुपारी और नारियल अर्पित कर प्रसाद वितरण किया गया। भक्त अपने घर लेकर जाकर परिवार के सभी सदस्यों के साथ बांटते हैं।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने मां के प्रति असीम श्रद्धा और भक्ति व्यक्त की, जिससे मंदिर परिसर में उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला।







