क्या धन बल से आज समाज में मुद्दे तय हो रहे है?

क्या धन बल से आज समाज में मुद्दे तय हो रहे है? सांस्कृतिक पतन कोई एक दिन में नहीं होता इसमें बहुत लंबा समय लगता है और समाज व संस्कृति किसी एक चीज से प्रभावित नहीं होती है कई कारण इसे बनाए रखते है। भारत बहुलतावादी देश है यहां कई धर्म संप्रदाय है। हम एक साझा संस्कृति है इसमें सबके लिए जगह है, सेक्युलर सोच बनाम कट्टरवाद एक देश की नहीं आज पूरी विश्व की समस्या है, हमे सोचना होगा कि हम अपने भविष्य की पीढ़ी को क्या देंगे एक साझा संस्कृति या एक एक लड़ता झगड़ता भारत जो धर्म इंसान को इंसान से अलग करे वो सच्चे अर्थों में बड़ा नहीं बन पाएगा, हिंदू राष्ट्र की मांग के बीच में हमे ये भी सोचना होगा कि देश की नींव ऐसे नहीं पड़ी थी। देश बहुलतावादी रहा है और हम सबको साथ लेके चलने वाले देश है, धर्मनिरपेक्षता एक सोच है न जो समाज में जरूरी है, हिंसा को समाज में जगह नहीं होनी चाहिए, खासतौर पर एक सभ्य समाज में जिसका एक गौरव है।
आज भी हम देख रहे है देश में धर्म के नाम पर बहस हो रही है, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दे पीछे कर दिए जा रहे है, जोकि देश को गलत दिशा में ले जा रहे है, चुनावी वादा व्हाट्सएप फॉरवर्ड से नहीं तय होता है, प्रोपोगंडा मशीनरी समाज में चुनाव तो जितवा सकती है लेकिन समाज में बदलाव नहीं ल सकती है और नैतिक पतन इसका एक बहुत बड़ा उदाहरण है।

आप और हम सड़क के गढ्डों से जूझ रहे है इसी टोल भी दे रहे है, जनता का पैसा एड्स में खर्च जो रहा है, विज्ञापन बुरा नहीं है लेकिन क्या सिर्फ प्रचार मिशनरी से आप जीत जाएंगे चुनाव, ये बड़ा सवाल है। एशिया में घट रहे आंदोलन ये सिद्ध कर रहे है कि लोकतंत्र की नींव कमजोर हो रही है और इसका गंभीर परिणाम तख्ता पलट से हो रहा है, कुछ लोग इसे प्रायोजित कह दे रहे है लेकिन क्या ये सच है जनता का आक्रोश सिर्फ पैसे से निर्धारित हो जाएगा क्या, सच्ची क्रांति दिल से जन्म लेती है और वो बदलाव के लिए होती है हिंसा के लिए नहीं आप अपने आस पास देखेंगे तो पाएंगे छोटी मोटी घटना कैसे बवाल का रूप धर लेती है, फेक न्यूज के दौर में इंसान उलझा है।

देश में गंगा जमुनी तहज़ीब पर होते हमले क्या सिखाते है |

आज टेक्नोलॉजी का उपयोग सबसे पहले सामाजिक तत्व कर ले रहे है, मीडिया भी इसे बचा नहीं है, आने वाले दिन और चुनौती भरे होंगे इस गंभीर संकट पे सरकार को ध्यान देना होगा, डिजिटल लिटरेसी प्रोग्राम ही इसका हल है, समाज में जितनी शिक्षा होगी उतना ज्यादा सुरक्षा का भाव उत्पन होगा।

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कोई भी व्यक्ति अकेले समाज नहीं होता, वो समाज का हिस्सा है, और समाज को दिशा देना हम सबका कर्तव्य है।
न्यूज 80 आपका अपना चैनल है जो आप तक आपके मुद्दे लाने में लगा है। आज मुद्दे सरकार नहीं बल्कि धन बल पर तय हो रहे है। इस विषय पर आप अपनी राय रखे और न्यूज 80 की मुहिम का हिस्सा बने। जय हिंद। इस मुद्दे पर और गंभीर जानकारी चाहने के लिए हम बहुत जल्द सब्सक्रिप्शन मॉडल में आपके सामने होंगे, आप तक निष्पक्ष न्यूज पहुंचे इस प्रयास को आपको ही बनाना पड़ेगा।

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