लखनऊ/उन्नाव। उत्तर प्रदेश के पत्रकारों को पेंशन योजना का लाभ दिलाने की मांग को लेकर अब प्रदेश भर में आवाज़ तेज हो रही है। पत्रकारों के हितों और सम्मान से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर लगातार संघर्ष किया जा रहा है। बजट सत्र से पत्रकारों को बड़ी उम्मीद थी कि सरकार पेंशन योजना की घोषणा करेगी, लेकिन ऐसा न होने से पत्रकार समाज में निराशा व्याप्त है।
सरकार और संबंधित अधिकारियों द्वारा अब तक इस विषय पर स्पष्ट रुख न अपनाए जाने से असंतोष बढ़ता जा रहा है। पत्रकार संगठनों का कहना है कि अब समय आ गया है कि पूरे प्रदेश के पत्रकार साथी खुलकर अपना समर्थन दें और स्पष्ट करें कि वे पेंशन योजना चाहते हैं या नहीं।
यह केवल आर्थिक सहायता का विषय नहीं, बल्कि पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है। पत्रकार समाज का मानना है कि जीवनभर लोकतंत्र की सेवा करने वाले पत्रकारों को वृद्धावस्था में सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार मिलना चाहिए। गौरतलब है कि पड़ोसी राज्य बिहार और उत्तराखंड सहित देश के लगभग 10 राज्यों में पत्रकार पेंशन योजना लागू है, जहां वरिष्ठ पत्रकारों को इसका लाभ मिल रहा है। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में अब तक ऐसी कोई ठोस व्यवस्था लागू नहीं की गई है। पत्रकार संगठनों ने सवाल उठाया है। कि उत्तर प्रदेश में वरिष्ठ पत्रकार साथियों को पेंशन योजना से वंचित क्यों रखा जा रहा है? सरकार और अधिकारियों को इस पर जवाब देना चाहिए। इस जनहितकारी मुहिम को जर्नलिस्ट प्रेस क्लब एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के संस्थापक/ प्रदेश अध्यक्ष हरिओम गुप्ता के नेतृत्व में प्रदेश स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा। संगठन ने सभी जिलों एवं राज्य मुख्यालय के पत्रकार साथियों से एकजुट होकर इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है।
पत्रकार समाज का मानना है कि यदि सभी पत्रकार साथी एक स्वर में अपनी मांग रखेंगे, तो सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
यह लड़ाई केवल पेंशन की नहीं, बल्कि पत्रकारों के सम्मान और अधिकार की है।









