आध्यात्मिक वातावरण में नवरात्रि साधना का समापन
शुक्लागंज (उन्नाव)। परम पूज्य गुरुदेव एवं वंदनीय माताजी के सूक्ष्म संरक्षण में 1 अक्टूबर 2025 को गायत्री शक्तिपीठ, बालू घाट, शुक्लागंज में नवरात्रि साधना की पूर्णाहुति बड़े भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुई।
सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। घंटा-घड़ियाल की ध्वनि, मंत्रोच्चारण और यज्ञ की अग्नि से वातावरण पूरी तरह पावन हो गया।

पांच कुण्डीय गायत्री महायज्ञ
इस अवसर पर पांच कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया। आचार्यों द्वारा वैदिक परंपरा के अनुसार अग्नि प्रज्वलन कर आहुतियों का क्रम शुरू हुआ।
भक्तों ने स्वाहा मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दीं। अग्निकुंड से उठता घी और हवन सामग्री का धुआं वातावरण को सुगंधित कर रहा था।
आचार्य जी का संदेश
आचार्य जी ने कहा कि गायत्री मंत्र केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि मानव जीवन के नैतिक, मानसिक व आध्यात्मिक विकास का साधन है।
गायत्री साधना सद्बुद्धि की प्रेरणा देती है और मन के नकारात्मक विचारों व कुवृत्तियों को दूर करती है।
नियमित जप से आयु, प्राण, शक्ति, सहयोगी, कीर्ति, धन एवं ब्रह्मतेज की प्राप्ति होती है। यह चौबीस उपासना के बराबर फल देती है।
उन्होंने कहा—“जैसे-जैसे साधना का प्रकाश बढ़ता है, वैसे-वैसे अंधकार समाप्त होता जाता है।”
संस्कारों का आयोजन – एक सामाजिक पहल
इस अवसर पर विभिन्न संस्कारों का सामूहिक आयोजन हुआ।
मुंडन संस्कार – 8 बच्चों का
नामकरण संस्कार – 10 बच्चों का
जन्मदिवस संस्कार – 9 श्रद्धालुओं का
विद्यारंभ संस्कार – 20 बच्चों का
विवाह संस्कार – युगल जोड़ों का
इन संस्कारों के माध्यम से समाज में संस्कारवान पीढ़ी निर्माण का संदेश दिया गया।
भंडारा व प्रसाद वितरण
महायज्ञ और संस्कारों के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
मंदिर परिसर में भंडारे के दौरान भक्तों के चेहरे पर प्रसन्नता साफ झलक रही थी।
सहयोगियों की भूमिका
पूरे आयोजन को सफल बनाने में श्रीमती दया साहू, सुमन साहू, मीरा चौरसिया, सालिनी चौरसिया, रीना गुप्ता, शशी गुप्ता, स्वाति कुंड, सुमन गुप्ता, कल्पना साहू सहित अनेक श्रद्धालुओं का उल्लेखनीय सहयोग रहा।
इसके अलावा वरिष्ठ परिजन और संस्थान के सदस्य भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संदेश
गायत्री शक्तिपीठ का यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सामाजिक व आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक रहा।
गायत्री साधना के माध्यम से मानव जीवन में सदाचार, शांति, आत्मबल और दिव्यता का संचार किया जा सकता है।
इस प्रकार के संस्कार व यज्ञ समाज को नई दिशा देते हैं।
समापन
समारोह के अंत में व्यवस्थापक आर.सी. गुप्ता ने सभी श्रद्धालुओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि गायत्री शक्तिपीठ समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा जिससे समाज में नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों का प्रचार-प्रसार हो सके।







