स्थायी व विश्वसनीय मित्रता जीवन की पूंजी है— आचार्य प्रदीप द्विवेदी

विद्यार्थी जीवन मनुष्य के पूरे जीवन का सबसे स्वर्णिम और निर्माणकारी काल माना जाता है। यही वह समय होता है जब व्यक्ति के चरित्र, आदर्श और संस्कार आकार लेते हैं। इस दौरान विद्यार्थी न केवल ज्ञान अर्जित करते हैं, बल्कि वे जीवन भर साथ निभाने वाले संबंध, अनुभव और सीख भी प्राप्त करते हैं।लेकिन वर्तमान समय में यह देखा जा रहा है कि अनेक छात्र अपने “बेस्ट ऑप्शन” की तलाश में मित्रों को बार-बार बदलते रहते हैं। नए लोगों से मित्रता करना और पुराने साथियों को भुला देना एक सामान्य चलन बन गया है। यह प्रवृत्ति संबंधों की पवित्रता और स्थिरता को कमजोर करती है तथा व्यक्ति के भीतर अस्थिरता व अविश्वास पैदा करती है।आज के युग में विद्यार्थियों के बीच मित्रता का अर्थ प्रायः मनोरंजन और सोशल मीडिया तक सीमित हो गया है। इंटरनेट की दुनिया में लाइक, कमेंट और फॉलो तक सिमटी दोस्ती क्षणिक और अविश्वसनीय होती है। ऐसे संबंध कठिन समय आने पर अक्सर साथ छोड़ देते हैं।इससे बचने के लिए आवश्यक है कि विद्यार्थी अपने विद्यालय, मित्रों और दैनिक जीवन की छोटी-छोटी बातों को अपने माता-पिता से साझा करें। माता-पिता जीवन के अनुभवों के आधार पर सही मार्गदर्शन देते हैं और गलत रास्तों से दूर रहने में मदद करते हैं।सच्ची मित्रता केवल लाभ या स्वार्थ पर आधारित नहीं होती। यह विश्वास, प्रेम, निष्ठा, समझदारी और साथ निभाने की भावना पर टिकी रहती है। इसलिए विद्यार्थियों को चाहिए कि वे ऐसे मित्रों का चुनाव करें जो जीवन की हर परिस्थिति में साथ दें, न कि केवल सुविधा के समय।


लेखक: प्रदीप द्विवेदी
एम.ए. (हिंदी, राजनीति), बी.पी.एड
खेल शिक्षक

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  • Hari Om Gupta

    Editor In Chief - The News 80

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