उन्नाव जनपद के गंगाघाट कोतवाली में इन दिनों अपराधियों से ज्यादा चर्चा एक ऐसे पुलिस अधिकारी की हो रही है। जो अपने कड़क एक्शन, पारदर्शी कामकाज, जनता के प्रति संवेदनशील व्यवहार और बेहतरीन टीम लीडरशिप के लिए जाना जाता है। उनका नाम है— प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार सिंह।
गंगाघाट की कमान संभालने के बाद से ही उन्होंने जो बदलाव किए हैं।वह न सिर्फ जनता महसूस कर रही है।बल्कि प्रशासन भी उनकी कार्यप्रणाली से प्रभावित है।
1. अपराध नियंत्रण में सबसे बड़ा सुधार — ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू
अजय कुमार सिंह की तैनाती के बाद गंगाघाट में सबसे बड़ा बदलाव दिखा है।अपराधियों पर नकेल कसना और अपराध दर में भारी गिरावट।
उनकी एक्शन लिस्ट में शामिल है।
गंगा कटरी की करोड़ों की जमीन पर वर्षों से चल रहे अवैध कब्जों की पहचान
भू-माफियाओं और अवैध प्लाटिंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई
हिस्ट्रीशीटरों की लोकेशन ट्रैकिंग और उनकी गतिविधियों पर 24×7 निगरानी
हर रात मुख्य मार्गों और स्लम एरिया में पैदल गश्त
संवेदनशील पॉकेट्स में विशेष निगरानी दल
स्थानीय लोगों का कहना है—
“कई सालों बाद पहली बार लगता है कि पुलिस वाकई अपराध रोकने में सीरियस है। इलाके में डर का माहौल खत्म हुआ है।”
2. थाने का माहौल बदला — पुलिस को जनता के लिए ‘सुलभ और संवेदनशील’ बनाया
पहले जहां थाने में लोगों की शिकायतें अनसुनी रह जाती थीं, वहीं आज स्थिति बिल्कुल उलट है।
अजय कुमार सिंह ने कोतवाली में लागू किया:
ओपन डेस्क सिस्टम — जहां आम जनता सीधे प्रभारी से मिल सकती है।
महिलाओं के लिए स्पेशल काउंसलिंग और हेल्प
प्रतिदिन निर्धारित समय पर जनसुनवाई
हर शिकायत का डायरेक्ट फॉलो-अप
पीड़ितों को प्रगति रिपोर्ट देना
कमजोर व वंचित वर्ग के लोगों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई
लोगों का कहना है—
“थाने में पहली बार ऐसा देखा कि पुलिस अधिकारी खुद कुर्सी से उठकर पीड़ितों की बात सुनते हैं।”
3. पुलिस टीम में अनुशासन और प्रोफेशनलिज्म — टीमवर्क जो नतीजे देता है।
अजय कुमार सिंह सिर्फ एक अधिकारी नहीं, बल्कि एक सख्त लेकिन प्रेरणादायक टीम लीडर के रूप में जाने जाते हैं।
उन्होंने पुलिस टीम में किए परिवर्तन:
ड्यूटी समय और व्यवहार पर कड़ी निगरानी
हर बीट प्रभारी को स्पष्ट जिम्मेदारी
बीट सिस्टम को डिजिटल सुदृढ़ किया
हर 48 घंटे में टीम समीक्षा
रात्रि गश्त का टाइम-टेबल फिक्स
कार्रवाई में देरी पर तत्काल कारण बताओ नोटिस
इसके बाद क्षेत्र में पुलिस की सक्रियता और विश्वसनीयता दोनों बढ़ गई हैं।
4. महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता — एंटी रोमियो और विशेष पेट्रोलिंग
स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटरों के आसपास विशेष गश्त
छेड़छाड़ व उत्पीड़न के मामलों पर जीरो डिले नीति
महिला हेल्पडेस्क को मजबूत किया
जरूरतमंद महिलाओं को कानूनी और भावनात्मक सहायता
रात के समय महिलाओं के लिए सुरक्षित रूट तैयार कराया
इस कारण क्षेत्र की छात्राओं और महिलाओं ने चैन की सांस ली है।
5. साइबर अपराध पर तेज कार्रवाई — तकनीक के साथ आधुनिक पुलिसिंग
आज के समय में साइबर फ्रॉड सबसे बड़ा खतरा है।
PI अजय कुमार सिंह ने इस मोर्चे पर भी बेहतरीन काम किया है
साइबर हेल्पडेस्क को एक्टिव किया
बैंक, UPI और ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में पीड़ितों को तुरंत राहत
मोबाइल ट्रैकिंग और डिजिटल सबूतों पर फोकस
युवाओं के बीच जागरूकता अभियान
कई मामलों में लोगों के लाखों रुपये रिकवर कराने में टीम सफल रही।
6. समुदाय के बीच गहरी पकड़ — जनता-पुलिस के बीच नई समझदारी
गंगाघाट में पुलिस और जनता के बीच दूरियां थीं।
लेकिन अजय कुमार सिंह ने इन दूरियों को मिटाकर दोनों के बीच भरोसे का मजबूत पुल बनाया है।
उन्होंने शुरू किए:
मोहल्ला मीटिंग
व्यापार मंडल से संवाद
सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा प्लानिंग
असामाजिक तत्वों पर सामूहिक निगरानी
नशाखोरी के खिलाफ अभियान
इससे पुलिसिंग सिर्फ ‘कानून लागू करना’ नहीं रह गई, बल्कि ‘समाज का मार्गदर्शन’ बन गई।
7. त्योहारों में शांतिपूर्ण माहौल — बिना किसी घटना के सफल प्रबंधन
कई बड़े धार्मिक त्योहारों के दौरान गंगाघाट क्षेत्र में भारी भीड़ होती है।
इस बार सभी त्योहार शांतिपूर्ण और सुरक्षित बीते।
पूरे इलाके को जोन व सेक्टर में बांटा
पीक समय में अतिरिक्त पुलिस बल
ड्रोन और CCTV से निगरानी
ट्रैफिक प्लानिंग के लिए विशेष इंतजाम
लोगों ने इस व्यवस्था की खुलकर तारीफ की।
निष्कर्ष — गंगाघाट में ‘मॉडल पुलिसिंग’ का जन्म
प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार सिंह की कार्यशैली ने साबित कर दिया कि
जब नेतृत्व मजबूत और नीयत साफ हो, तो पुलिसिंग सिर्फ नौकरी नहीं बल्कि समाजसेवा बन जाती है।
आज गंगाघाट ज्यादा सुरक्षित है। ज्यादा अनुशासित है।
और जनता का भरोसा भी ज्यादा मजबूत है।
यह बदलाव किसी चमत्कार से कम नहीं।
यह बदलाव एक अधिकारी के समर्पण और कड़े एक्शन से आया है।







