सेवा क्षेत्र में मस्त, लेकिन पर कैपिटा इनकम में सुस्त भारत- हेडलाइन

✒️अंकित अवस्थी

सेवा क्षेत्र में बढ़त, लेकिन भारत का पर कैपिटा पस्त

अगस्त 2025 में भारत का सेवा क्षेत्र एक ऐतिहासिक मुकाम पर पहुँच गया। परचेज़िंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) 62.9 तक पहुँच गया, जो पिछले पंद्रह वर्षों का उच्चतम स्तर है। इसका अर्थ है कि सेवा क्षेत्र की कंपनियों को न सिर्फ़ घरेलू बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार नए ऑर्डर मिल रहे हैं। यह सिलसिला लगातार 49 महीनों से जारी है, और इसने यह धारणा मज़बूत कर दी है कि भारत की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा इंजन अब सेवा क्षेत्र ही है।

इसी के साथ, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में भारत की GDP वृद्धि दर 7.8% रही, जो पिछले पाँच तिमाहियों में सबसे ऊँचा स्तर है। इस वृद्धि में निर्णायक भूमिका भी सेवा क्षेत्र ने निभाई। सवाल यही उठता है कि क्या यह वृद्धि आम नागरिक की ज़िंदगी में दिख रही है?


भारत में सेवा क्षेत्र का परिदृश्य

भारत की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का हिस्सा लगातार मज़बूत होता जा रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में सेवा क्षेत्र का Gross Value Added (GVA) लगभग 16,49,252 अरब रुपये रहा, जो कुल GVA का 55% है। यानी, हर दो रुपये की आर्थिक गतिविधि में से एक रुपया सेवा क्षेत्र से आ रहा है।

यह क्षेत्र अब केवल पारंपरिक बैंकों या बीमा कंपनियों तक सीमित नहीं है। इसमें IT और BPO से लेकर ई-कॉमर्स, डिजिटल पेमेंट्स, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा प्रौद्योगिकी, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स सब शामिल हैं। यही कारण है कि इसे “नए भारत की वृद्धि मशीन” कहा जाने लगा है।


प्रति-व्यक्ति GDP की तस्वीर

अब ज़रा प्रति-व्यक्ति योगदान पर नज़र डालते हैं।

भारत की अनुमानित जनसंख्या 2024-25 में लगभग 1.43 अरब है।

सेवा क्षेत्र का कुल योगदान बाँटने पर, इसका प्रति-व्यक्ति योगदान लगभग ₹1.15 लाख सालाना आता है।

वहीं, पूरे देश का औसत प्रति-व्यक्ति GDP लगभग ₹2.07 लाख सालाना है।


इस तुलना से पता चलता है कि सेवा क्षेत्र का प्रति-व्यक्ति योगदान राष्ट्रीय औसत से लगभग 55–60% के आसपास है। यानी यह क्षेत्र भले ही अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा हिस्सा है, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर इसका लाभ अब भी उतना नहीं पहुँच पा रहा, जितना दिखता है।

राज्यों में असमान तस्वीर

राज्यों की बात करें तो परिदृश्य और स्पष्ट हो जाता है।

तेलंगाना की प्रति-व्यक्ति आय लगभग ₹3.79 लाख है, जो राष्ट्रीय औसत से करीब दोगुनी है। यहाँ सेवा क्षेत्र का हिस्सा कुल GDP का 66.3% है।
वहीं, उत्तर प्रदेश या बिहार जैसे राज्यों में प्रति-व्यक्ति आय अब भी राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे है और सेवा क्षेत्र की पकड़ भी कमज़ोर है।

इस असमानता से यह साफ़ है कि सेवा क्षेत्र का विकास देशभर में एक समान नहीं है। कुछ राज्य इसे रोजगार, निवेश और व्यक्तिगत आय में तब्दील करने में सफल हैं, जबकि बाकी पिछड़ रहे हैं।

सेवा क्षेत्र के सामने चुनौतियाँ

1. क्षेत्रीय असंतुलन – महानगरों और चुनिंदा राज्यों तक ही सेवा क्षेत्र केंद्रित है।


2. कौशल अंतर – छोटे शहरों और ग्रामीण युवाओं के पास वह डिजिटल और भाषा कौशल नहीं है, जिसकी सेवा क्षेत्र में माँग है।


3. अवसंरचना की कमी – बिजली, इंटरनेट और ट्रांसपोर्ट की सीमाएँ नए सेवा उद्योगों को फैलने से रोकती हैं।


4. अनौपचारिक रोजगार – BPO, डिलीवरी और गिग इकॉनमी में काम करने वालों की सामाजिक सुरक्षा और स्थिरता अब भी बड़ी चुनौती है।

नीतिगत रूपरेखा: आगे का रास्ता

भारत के सेवा क्षेत्र को न सिर्फ़ तेज़ी से बढ़ना है, बल्कि इस वृद्धि को “समावेशी” भी बनाना है। इसके लिए कुछ ठोस कदम ज़रूरी हैं:

क्षेत्रीय विस्तार: तेलंगाना की तरह अन्य राज्यों में भी IT पार्क, फिनटेक हब और हेल्थ-टेक क्लस्टर बनाए जाएँ।

कौशल प्रशिक्षण: ग्रामीण युवाओं के लिए डिजिटल और संचार कौशल पर आधारित कार्यक्रम शुरू हों।

डिजिटल अवसंरचना: 5G और हाई-स्पीड इंटरनेट का प्रसार हर जिले तक पहुँचे।

MSME समर्थन: छोटे सेवा कारोबारियों को आसान ऋण, टैक्स रियायतें और ई-कॉमर्स तक पहुँच दिलाई जाए।

निर्यात प्रोत्साहन: भारत के शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन को वैश्विक ब्रांडिंग मिले।

गिग इकॉनमी सुरक्षा: फ्रीलांसरों और डिलीवरी एजेंट्स के लिए न्यूनतम वेतन और बीमा की व्यवस्था हो।

सेवा क्षेत्र ने भारत की आर्थिक गाड़ी को नई गति दी है। 15 वर्षों का उच्चतम PMI और तिमाही GDP में 7.8% की वृद्धि इसका सबूत हैं। लेकिन जब तक इस वृद्धि का लाभ प्रति-व्यक्ति आय और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में स्पष्ट नहीं दिखेगा, तब तक यह कहानी अधूरी रहेगी।

इसलिए ज़रूरत है कि नीति-निर्माता, उद्योग और समाज मिलकर यह सुनिश्चित करें कि सेवा क्षेत्र की चमक केवल आंकड़ों तक न रहे, बल्कि यह भारत के हर नागरिक की जेब, रोज़गार और जीवन स्तर तक पहुँचे।

शेयर करें
  • Related Posts

    Faire HypeBet Casino Offrir Ampère Mobile Jeux Dargent Voir à l’intérieur de la France Sign Up Today alexandercasino

    Faire HypeBet Casino Offrir Ampère Mobile Jeux Dargent Voir à l’intérieur de la France Sign Up Today alexandercasino vers environ cause du compositeur , surtout lorsque utiliser sûrs dépôt méthode…

    शेयर करें

    चित्रकूट विधानसभा सीट: आस्था, उपेक्षा और 2027

    चित्रकूट विधानसभा सीट: आस्था, उपेक्षा और 2027 के चुनाव की निर्णायक परीक्षा– उत्तर प्रदेश का चित्रकूट जिला देशभर में अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाता है। रामायण…

    शेयर करें

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *