उन्नाव। कानपुर–लखनऊ रेल रूट पर बुधवार रात वो मंजर देखने को मिला, जब जरा-सी लापरवाही या साजिश सैकड़ों जिंदगियों पर भारी पड़ सकती थी। मगरवारा रेलवे स्टेशन के पास डाउन लाइन पर सीमेंटेड स्लीपर रखे मिलने से हड़कंप मच गया। उसी वक्त नई दिल्ली से लखनऊ दौड़ रही तेजस एक्सप्रेस गंगाघाट स्टेशन पर पहुंच चुकी थी।कंट्रोल रूम से अलर्ट मिलते ही स्टेशन मास्टर ने बिना एक पल गंवाए सिग्नल रोक दिया। तेजस एक्सप्रेस को डाउन की लूप लाइन में खड़ा कर दिया गया। हाई-स्पीड ट्रेन के अचानक रुकते ही यात्रियों में अफरा-तफरी फैल गई—कोई खिड़की से झांकता दिखा, तो कोई मोबाइल पर अपनों को हाल बताता नजर आया। प्लेटफॉर्म पर तनाव साफ महसूस हो रहा था।सूचना मिलते ही जीआरपी, आरपीएफ और रेलवे अफसरों की टीम मौके पर पहुंची। ट्रैक पर रखे सीमेंटेड स्लीपर को तुरंत हटवाया गया और इंच-इंच ट्रैक की जांच की गई। करीब आधे घंटे तक रेल यातायात पर ब्रेक लगा रहा और पूरे सिस्टम की धड़कनें तेज रहीं।जांच के बाद ट्रैक को पूरी तरह सुरक्षित घोषित किया गया। कंट्रोल से हरी झंडी मिली और 27 मिनट बाद रात 9:19 बजे तेजस एक्सप्रेस दोबारा लखनऊ की ओर रवाना हुई। तब जाकर यात्रियों ने राहत की सांस ली।
आरपीएफ इंस्पेक्टर हरीश कुमार मीणा के अनुसार, मगरवारा स्टेशन के पास गिट्टी उतारने का काम चल रहा है। आशंका है कि उसी दौरान कंपन से सीमेंटेड स्लीपर पटरी पर आ गया हो, हालांकि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।
🔥 सवाल बड़ा है
क्या यह महज हादसा था या किसी बड़ी अनहोनी की तैयारी?
जो भी हो, रेलवे की सतर्कता ने एक बार फिर साबित कर दिया—एक सही फैसला सैकड़ों जिंदगियां बचा सकता है।







