उन्नाव। बदरका स्थित अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की जन्मभूमि एक बार फिर राष्ट्रभक्ति के नारों से गूंज उठी। अवसर था शहीद-ए-आजम की 120वीं जयंती पर आयोजित त्रिदिवसीय भव्य समारोह का। इस कार्यक्रम के दूसरे दिन शिरकत करने पहुंचे उन्नाव के भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने जहां एक ओर क्रांतिकारियों की शहादत को नमन किया, वहीं दूसरी ओर चर्चित ‘उन्नाव कांड’ और कुलदीप सिंह सेंगर को लेकर दिए गए उनके बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
शहीद चंद्रशेखर आजाद: युवाओं के लिए अनंत प्रेरणास्रोत
सांसद साक्षी महाराज ने सबसे पहले शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आजाद का जीवन साहस और स्वाभिमान की वह गाथा है, जो युगों-युगों तक भारतीय युवाओं का मार्ग प्रशस्त करती रहेगी।
सांसद ने कहा, “आजाद ने बहुत कम उम्र में यह संकल्प लिया था कि वे कभी अंग्रेजों की बेड़ियों में नहीं जकड़े जाएंगे। उनका नारा ‘आजाद हूं, आजाद रहूंगा’ मात्र शब्द नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा थी। आज की पीढ़ी को उनके त्याग और राष्ट्रप्रेम से सीख लेने की जरूरत है।” उन्होंने इस तीन दिवसीय आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का काम करते हैं।
कुलदीप सेंगर पर बड़ा बयान: ‘अन्याय हुआ है’
श्रद्धांजलि सभा के बाद मीडिया से मुखातिब हुए साक्षी महाराज अपने चिरपरिचित बेबाक अंदाज में नजर आए। उन्नाव रेप कांड और सजायाफ्ता पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के सवाल पर उन्होंने चौंकाने वाला बयान दिया। सांसद ने कहा कि यद्यपि वे न्यायालय के निर्णय का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन उनका व्यक्तिगत मत यह है कि कुलदीप सिंह सेंगर के साथ इस पूरे प्रकरण में ‘अन्याय’ हुआ है।
साक्षी महाराज ने अपनी बात को विस्तार देते हुए कहा, “न्याय मिलने में न केवल देरी हुई, बल्कि इस प्रकरण के कारण उन्नाव जनपद की छवि को राष्ट्र स्तर पर जो नुकसान पहुँचा, वह अत्यंत दुखद है। एक व्यक्ति के कारण पूरे जनपद को बदनाम करने की कोशिश की गई।” उन्होंने अपील की कि न्यायालय को हर पहलू की गहराई से जांच कर ही अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।
दंगाइयों और हत्यारोपियों की जमानत पर सख्त रुख
सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों और कानून व्यवस्था पर चर्चा करते हुए सांसद ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन लोगों पर देश में दंगे भड़काने, समाज को बांटने और जघन्य हत्याओं जैसे गंभीर आरोप हैं, उन्हें किसी भी सूरत में जमानत नहीं मिलनी चाहिए।
उन्होंने देश की सर्वोच्च अदालत के कड़े रुख का समर्थन करते हुए कहा, “देश की एकता और अखंडता के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए कानून में कोई नरमी नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने जो भी निर्णय लिए हैं, वे देशहित में हैं और हम उनका पूर्णतः सम्मान करते हैं।”
देशभक्ति के रंग में डूबा बदरका
आजाद की जयंती पर आयोजित इस तीन दिवसीय समारोह में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। कार्यक्रम स्थल पर भारी संख्या में क्षेत्रीय लोग और युवा एकत्र हुए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से स्कूली बच्चों ने देश की आजादी की कहानियों को जीवंत किया। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि इस मेले और समारोह का मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं में राष्ट्रवाद की भावना को जागृत करना है।
साक्षी महाराज के इस दौरे ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि वे भले ही पार्टी लाइन और कोर्ट के फैसलों का सम्मान करने की बात कहें, लेकिन अपने क्षेत्र के पुराने सहयोगियों के प्रति उनकी सहानुभूति अभी भी बरकरार है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है।







