उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में खाकी एक बार फिर दागदार हुई है। जहाँ एक तरफ सरकार पुलिस को जनता का ‘मित्र’ बनाने की कोशिश कर रही है, वहीं उन्नाव सदर कोतवाली क्षेत्र से पुलिसिया गुंडागर्दी की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर रूह कांप जाए। गदनखेड़ा इलाके में तैनात एक सिपाही ने सरेराह एक बेगुनाह युवक को इस कदर बेरहमी से पीटा कि उसकी नाक और सिर फट गया। पीड़ित युवक फिलहाल अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है और आरोपी सिपाही मौके से फरार है।
क्या है पूरा मामला
मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित सत्यम सिंह अपने निजी काम से रास्ते से गुजर रहा था। तभी गदनखेड़ा इलाके में तैनात सिपाही जितेंद्र सिंह तोमर ने उसे रोक लिया। पीड़ित का आरोप है कि सिपाही ने उसे रोकते ही बिना किसी कारण के भद्दी-भद्दी गालियां देनी शुरू कर दीं। जब सत्यम ने इस अभद्रता का विरोध किया, तो वर्दी के रौब में चूर सिपाही ने कानून हाथ में लेते हुए उस पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया।
आरोप है कि सिपाही सत्यम को तब तक मारता रहा जब तक वह लहूलुहान होकर सड़क पर नहीं गिर गया। सिपाही का हमला इतना घातक था कि सत्यम के सिर में गंभीर चोट आई है और उसकी नाक की हड्डी पर गहरा प्रहार हुआ है। यदि आसपास के लोग बीच-बचाव न करते, तो सिपाही के इरादे जान लेने तक के थे।
आरोपी सिपाही का पुराना ‘काला इतिहास’
‘Truth India Times’ की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि आरोपी सिपाही जितेंद्र सिंह तोमर कोई ‘दूध का धुला’ नहीं है। बताया जा रहा है कि यह सिपाही पहले भी मारपीट और अभद्रता के एक मामले में निलंबित (Suspend) किया जा चुका है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि एक निलंबित हो चुके और विवादित कार्यप्रणाली वाले सिपाही को दोबारा क्षेत्र में तैनात कर जनता पर जुल्म ढाने की छूट किसने दी? क्या पुलिस महकमे के आला अधिकारी इस सिपाही की गुंडागर्दी से वाकिफ नहीं थे?
जनता में भारी आक्रोश, पुलिस पर उठे सवाल
सत्यम सिंह की खून से लथपथ हालत देखकर गदनखेड़ा इलाके के स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है। डॉक्टरों के अनुसार, सत्यम की हालत नाजुक बनी हुई है और उसे लगातार ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर रक्षक ही भक्षक बन जाएंगे, तो आम आदमी अपनी सुरक्षा के लिए किसके पास जाएगा? लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपी सिपाही के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
तहरीर पर जांच की खानापूर्ति या होगी गिरफ्तारी?
घटना के बाद घायल सत्यम सिंह ने सदर कोतवाली में लिखित तहरीर दी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि घटना के बाद से आरोपी सिपाही जितेंद्र सिंह तोमर फरार क्यों है? क्या उसे विभाग के ही किसी रसूखदार व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त है? पीड़ित ने जानलेवा हमले और गाली-गलौज की धाराओं में कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
‘Truth India Times’ के कड़े सवाल:
सीधी जवाबदेही: क्या सदर कोतवाली पुलिस अपने ही साथी सिपाही पर निष्पक्ष कार्रवाई करेगी?
निलंबन का असर क्यों नहीं?: जो सिपाही पहले भी सस्पेंड हो चुका है, उसके व्यवहार में बदलाव के बजाय हिंसा की प्रवृत्ति क्यों बढ़ रही है?
जनता की सुरक्षा: क्या आम नागरिकों को घर से निकलते समय अब अपराधियों के बजाय पुलिस से डरना पड़ेगा?
उच्चाधिकारियों की चुप्पी: उन्नाव के पुलिस अधीक्षक (SP) इस मामले में क्या कड़ा कदम उठाएंगे ताकि भविष्य में कोई दूसरा सिपाही ऐसी हिमाकत न करे?
निष्कर्ष
वर्दी अनुशासन और सुरक्षा का प्रतीक होती है, लेकिन जितेंद्र सिंह तोमर जैसे सिपाही पूरी पुलिस बिरादरी को बदनाम कर रहे हैं। सत्यम सिंह के सिर से गिरता खून आज सिस्टम से जवाब मांग रहा है। ‘Truth India Times’ इस मामले को तब तक उठाता रहेगा जब तक पीड़ित को न्याय नहीं मिल जाता और आरोपी सिपाही सलाखों के पीछे नहीं पहुँचता।







