सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला” – जयंती विशेष
सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला” (1896–1961) हिंदी साहित्य के सबसे महत्वपूर्ण आधुनिक कवियों में से एक हैं। उनका जीवन, काव्य, और सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टिकोण एक गहन संवेदनशीलता और मानवीय संघर्ष से भरा हुआ…
चित्रकूट कोषागार घोटाला: भ्रष्टाचार की परतें और लोकपाल की विफलता
चित्रकूट कोषागार घोटाला: चित्रकूट के कोषागार में हाल ही में सामने आया 50 करोड़ रुपये का घोटाला एक और उदाहरण है कि कैसे सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार अपनी जड़ें जमाए…
पाक–अफगान तनाव: बारूद की सीमा पर एशिया का शांति-संदेश
अक्टूबर 2025 में पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच अचानक भड़की सीमा झड़पों ने एक बार फिर पूरे एशिया को अस्थिरता के डर में डाल दिया है। दोनों देशों के बीच…
राम मनोहर लोहिया: सामाजिक चेतना का शिल्पकार
12 अक्टूबर 1967 को नई दिल्ली में 57 वर्ष की आयु में लोहिया का देहांत हुआ था। इसे आज उनकी पुण्यतिथि के रूप में याद किया जाता है — वह…
जयप्रकाश नारायण: लोकतंत्र की आत्मा और आज के भारत की चेतना
जयप्रकाश नारायण:जब भारत में राजनीति का अर्थ केवल सत्ता-संघर्ष तक सीमित हो गया है, तब जयप्रकाश नारायण का नाम हमें याद दिलाता है कि राजनीति का सबसे ऊँचा उद्देश्य समाज…
धरती पुत्र की विरासत: मुलायम सिंह से अखिलेश तक समाजवाद की बदलती परिभाषा”
मुलायम सिंह: उत्तर प्रदेश की राजनीति में “धरती पुत्र” कहे जाने वाले मुलायम सिंह यादव का नाम केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक युग का प्रतीक रहा है — वह…
ग्रामोदय से भारतोदय तक: नवाचार की नई परिभाषा गढ़ता ग्रामीण भारत
भारत के विकास की असली कहानी शहरों की चमक से नहीं, बल्कि गाँवों की मिट्टी से लिखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” अभियान और मुख्यमंत्री योगी…
कानपुर में स्कूटी धमाके ने मचाई हलचल: सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
कानपुर के मूलगंज इलाके में बुधवार शाम को एक ताजे विस्फोट ने शहर के बाज़ार को हिला दिया। दो स्कूटी में अचानक हुई जोरदार धमाका धमाका वहाँ पर अफरातफरी मचा…
कांशीराम: बहुजन चेतना के स्थापत्यकार
परिनिर्वाण दिवस विशेष: भारत की राजनीति में ऐसे कुछ ही नेता हुए हैं जिन्होंने अपने विचारों से वंचित समाजों को सत्ता के केंद्र तक पहुँचाने की ठोस रणनीति दी। कांशीराम…
महर्षि वाल्मीकि: आत्मपरिवर्तन के आदिकवि और आधुनिक युग के लिए प्रेरणा
अंधकार से आलोक की यात्रा भारतीय संस्कृति में महर्षि वाल्मीकि को “आदिकवि” कहा जाता है — क्योंकि उन्होंने शब्दों के माध्यम से पहली बार मानव आत्मा की यात्रा को चित्रित…











