दिलीप कुमार: पुण्यतिथि विशेष

दिलीप कुमार: हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ नाम सिर्फ कलाकार नहीं, बल्कि संस्थान बन जाते हैं—और उस विरले समूह के शीर्ष पर खड़े हैं दिलीप कुमार, जिनके बिना भारतीय…

दादा देवी दत्त अग्निहोत्री के निर्वाण दिवस पर स्मृति सभा का आयोजन

देवी दत्त अग्निहोत्री: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता और समाजवादी आंदोलन के प्रमुख व्यक्तित्व, दादा देवी दत्त अग्निहोत्री के निवाण दिवस के अवसर पर आज दादा देवी दत्तअग्निहोत्री जच्चा…

पंडित रवि शंकर: तंत्र, साधना और सुरों से जन्मी वह वैश्विक विरासत

पंडित रवि शंकर: तंत्र, साधना और सुरों से जन्मी वह वैश्विक विरासत भारतीय संगीत का वह अध्याय, जो देश की सीमाओं से निकलकर पूरी दुनिया के सांस्कृतिक नक्शे पर दर्ज…

प्रफुल्ल चाकी: भारतीय क्रांतिकारी चेतना के दीप

प्रफुल्ल चाकी: भारतीय क्रांतिकारी चेतना के दीप : 10 दिसंबर 1888 को जन्मे प्रफुल्ल चाकी उस पीढ़ी के प्रतीक थे जिसने भारतीय स्वतंत्रता-संग्राम में “अहिंसक प्रार्थना” से अधिक “सशस्त्र विद्रोह”…

भारत के श्रम बाज़ार में स्किल संकट ?

स्किल संकट: निजी और सरकारी—दोनों क्षेत्रों में कर्मचारियों पर बढ़ते कार्य-दबाव ने हाल के वर्षों में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) को मजबूरी जैसा बना दिया है। संगठनों में लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा,…

2026 पश्चिम बंगाल चुनाव: सत्ता, समाज और बदलाव

2026 पश्चिम बंगाल चुनाव: 2026 का पश्चिम बंगाल चुनाव किसी साधारण राजनीतिक मुकाबले की तरह नहीं, बल्कि राज्य की आत्मा में लंबे समय से चल रहे संघर्षों की नई परतें…

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय: राष्ट्रवाद और ‘वंदे मातरम्’ की गूंज

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय: दिसंबर के सांस्कृतिक कैलेंडर में एक और नाम अक्सर उभरता है—बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय।भले ही उनका जन्म जून में और निधन अप्रैल में है, पर बंगाल और देशभर…

जोश मलिहाबादी- उर्दू शायरी के ‘शायर-ए-इंकलाब’

नई दिल्ली, दिसंबर — दिसंबर उर्दू अदब का वह महीना है जब साहित्यिक मंचों पर बार-बार एक ही नाम सुनाई देता है — 22 दिसंबर उनकी पुण्यतिथि के रूप में…

Sanchar Saathi: विपक्ष के सवाल?

Sanchar Saathi: भारत जैसे विशाल डिजिटल इकोसिस्टम में मोबाइल फोन अब पहचान, बैंकिंग, सुरक्षा और रोज़मर्रा के लॉजिस्टिक्स का केंद्र बन चुका है। ऐसे दौर में फोन-चोरी, IMEI क्लोनिंग, फर्जी…

सिद्धारमैया vs. डीके शिवकुमार का विवाद: भविष्य की राजनीति का टकराव

सिद्धारमैया vs. डीके शिवकुमार: कर्नाटक की राजनीति इन दिनों एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ सत्ता की कुर्सी सिर्फ प्रशासनिक ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि व्यक्तिगत वर्चस्व, समूहगत ताक़त और अंदरूनी…