किसान दिवस: खेत, किसान और आज के भारत की सच्चाई

किसान दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि उस वर्ग की स्थिति पर आत्ममंथन का अवसर है, जिसके श्रम पर देश की खाद्य सुरक्षा टिकी है। भारत का किसान आज भी…

सोलर ऊर्जा: भारत के ग्रामीण और शहरी भविष्य की आधारशिला

सोलर ऊर्जा: भारत आज ऐसे दौर में खड़ा है जहाँ ऊर्जा की मांग तेज़ी से बढ़ रही है और पर्यावरणीय संकट भी उतनी ही गति से गहराता जा रहा है।…

श्रीनिवास रामानुजन जयंती: प्रतिभा, संघर्ष और भारतीय बौद्धिक विरासत का उत्सव

श्रीनिवास रामानुजन: रामानुजन केवल एक गणितज्ञ नहीं थे, वे उस संभावना का नाम थे जो सीमित संसाधनों, कठिन परिस्थितियों और उपेक्षा के बीच भी असाधारण ऊँचाइयों तक पहुँच सकती है।…

अपराध का नैरेटिव: मीडिया, शक्ति और न्याय

अपराध का नैरेटिव: कानून की किताबों में अपराध और न्याय के बीच एक स्पष्ट रेखा खींची गई है—सबूत, प्रक्रिया और निष्पक्षता। लेकिन वास्तविक दुनिया में यह रेखा अक्सर मीडिया शोर,…

विजय दिवस: युद्धों की स्मृति, शांति का मूल्य

विजय दिवस: भारत का इतिहास केवल सभ्यताओं का नहीं, बल्कि उन संघर्षों का भी साक्षी है जिनमें देश ने अपने अस्तित्व, सम्मान और मूल्यों की रक्षा की। विजय दिवस हमें…

मेटाफर लिट फेस्ट – लखनऊ का सबसे बड़ा साहित्यिक मंच हुआ गुलज़ार

मेटाफर लिट फेस्ट : मिलन वोहरा—लेखिका और TEDx वक्ता—ने अपनी साहित्यिक यात्रा की शुरुआत प्रेम-कथाओं से की। शुरुआती दौर में उनका विश्वास था कि प्रेम का अर्थ कोमलता और सौम्यता…

रजनीकांत: जन्मदिन विशेष—संघर्ष से सुपरस्टारडम तक

रजनीकांत: भारतीय सिनेमा के विशाल आकाश में रजनीकांत वह चमकता सितारा हैं जो न केवल अपने अभिनय से, बल्कि अपने व्यक्तित्व से भी करोड़ों दिलों में जगह बनाए हुए हैं।…

दिलीप कुमार: पुण्यतिथि विशेष

दिलीप कुमार: हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ नाम सिर्फ कलाकार नहीं, बल्कि संस्थान बन जाते हैं—और उस विरले समूह के शीर्ष पर खड़े हैं दिलीप कुमार, जिनके बिना भारतीय…

पंडित रवि शंकर: तंत्र, साधना और सुरों से जन्मी वह वैश्विक विरासत

पंडित रवि शंकर: तंत्र, साधना और सुरों से जन्मी वह वैश्विक विरासत भारतीय संगीत का वह अध्याय, जो देश की सीमाओं से निकलकर पूरी दुनिया के सांस्कृतिक नक्शे पर दर्ज…

प्रफुल्ल चाकी: भारतीय क्रांतिकारी चेतना के दीप

प्रफुल्ल चाकी: भारतीय क्रांतिकारी चेतना के दीप : 10 दिसंबर 1888 को जन्मे प्रफुल्ल चाकी उस पीढ़ी के प्रतीक थे जिसने भारतीय स्वतंत्रता-संग्राम में “अहिंसक प्रार्थना” से अधिक “सशस्त्र विद्रोह”…