नोबेल पुरस्कार: इतिहास, वर्तमान और भविष्य पर एक नजर
नोबेल पुरस्कार की घोषणा के साथ एक विचार मन में उठा की इसके भूत, भविष्य और वर्तमान पर बात की जाये न्यूज़ 80 के मंच से बात करना उचित लगा…
नीतीश बनाम तेजस्वी और प्रशांत किशोर — अनुभव, उम्मीद और वैकल्पिक राजनीति की त्रयी
Bihar Election 2025 Analysisबिहार की राजनीति इस समय तीन दिशाओं में बंटी हुई है।एक ओर हैं नीतीश कुमार, जो अपने अनुभव और प्रशासनिक संतुलन का दावा करते हैं;दूसरी ओर तेजस्वी…
भगत सिंह: श्रद्धा से विचार तक — संघ और भाजपा की दृष्टि से बलिदान का अर्थ
भगत सिंह: जब गोरे अंग्रेज़ चले जाएंगे, तो क्या काले अंग्रेज़ राज नहीं करेंगे?”— भगत सिंह का यह सवाल आज भी समय के पार गूंजता है। यह सवाल केवल औपनिवेशिक…
साम्प्रदायिक हिंसा: जब नफ़रत के नाम पर जलता है इंसानियत का घर
नई दिल्ली। भारत जैसे बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक देश में जब साम्प्रदायिक हिंसा भड़कती है, तो केवल घर या दुकानें नहीं जलतीं — समाज की आत्मा झुलस जाती है। धर्म के…
भारतीय ज्ञान परंपरा : ह्रास, वर्तमान संकट और भविष्य की राह
भारत को प्राचीन काल से ही “ज्ञानभूमि” कहा गया है। यहाँ वेद, उपनिषद, महाभारत, रामायण जैसे महाकाव्यों से लेकर आयुर्वेद, ज्योतिष, योग, गणित, वास्तु और दर्शन तक अनेक शाखाएँ विकसित…
रिंकू सिंह: झुग्गी से क्रिकेट की ऊँचाइयों तक
रिंकू सिंह का नाम आज भारतीय क्रिकेट में एक नए जज़्बे का प्रतीक है। उनकी कहानी केवल मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि मेहनत, संघर्ष और भरोसे की ऐसी मिसाल…
लद्दाख: बर्फ की घाटियों में गूंजती मांग, “हम भी राज्य हैं”
लद्दाख: बर्फ की घाटियों में गूंजती मांग, “हम भी राज्य हैं”: लेह की सर्द गलियों में, जहां सुबह की धूप बर्फ की चोटियों पर सुनहरी परत बिछाती है, वहां इन…
बिहार चुनाव 2025: जात-पात के पार या विकास का नया अध्याय?
बिहार की राजनीति हमेशा से सामाजिक समीकरणों और सत्ता की जोड़तोड़ पर आधारित रही है। लेकिन 2025 का विधानसभा चुनाव एक नए दौर का संकेत देता है—क्या इस बार वोटर…
GST 2.0: कर व्यवस्था की नई परिभाषा
भारत की कर-नीति पिछले एक दशक में जिस सबसे बड़े प्रयोग से गुज़री है, उसका नाम है – वस्तु एवं सेवा कर (GST)। 2017 में इसके लागू होने के समय…
ज्ञान का असली आसमान – शिक्षक दिवस विशेष
✒️अंकित अवस्थी भारत में जब भी शिक्षा की बात होती है, तो सबसे पहले उम्मीदों का बोझ सामने आ जाता है। यह बोझ सिर्फ छात्रों पर नहीं, बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों…

















