साम्प्रदायिक हिंसा: जब नफ़रत के नाम पर जलता है इंसानियत का घर
नई दिल्ली। भारत जैसे बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक देश में जब साम्प्रदायिक हिंसा भड़कती है, तो केवल घर या दुकानें नहीं जलतीं — समाज की आत्मा झुलस जाती है। धर्म के…
हमीरपुर जेल में बंदी अनिल द्विवेदी की संदिग्ध मौत।
हमीरपुर: जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र के सूरजपुर इलाके में रहने वाले बंदी अनिल द्विवेदी की 14 सितंबर 2025 को जिला कारागार में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस…
🚆 कालका एक्सप्रेस के इंजन से ‘फर्जी लोको पायलट’ गिरफ्तार
इटावा रेलवे स्टेशन पर सनसनीखेज मामला, नकली आईडी, यूनिफॉर्म, झंडियां और लॉगबुक भी बरामद इटावा। कालका एक्सप्रेस (हावड़ा-कालका रूट) के इंजन में बैठे एक युवक को जीआरपी और रेलवे कर्मियों…
नक़ली दवाएँ व मिलावटी खाद्य पदार्थ” — राजस्थान की ताज़ा त्रासदी और इससे उठने वाली सख्त माँगे
राजस्थान में हाल-फिलहाल सामने आई घटनाएँ — जहाँ कुछ बच्चों की मौतें कथित तौर पर संदिग्ध कफ़-सिरप के सेवन या मिलावटी खाद्य पदार्थों के कारण हुईं — ने एक बार…
राम बनाम रावण — एक संतुलित विश्लेषण
प्राचीन भारतीय महाकाव्य रामायण में राम और रावण दोनों ही केवल व्यक्तित्व नहीं, बल्कि मूल्य-प्रतीक हैं। इतिहास, लोककथा और धर्म-विचार ने इन दोनों को अलग-अलग रूपों में प्रस्तुत किया है…
प्रेमानंद जी महाराज: भक्ति, सरलता और आधुनिक युग की एक अनोखी आवाज़
प्रेमानंद जी महाराज: आध्यात्मिक जगत में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो सिर्फ अपने प्रवचनों या आश्रमों से नहीं, बल्कि अपनी साधारणता और विनम्रता से भी लोगों के दिल में…
प्रेस पर हमले और आज़ादी की कीमत: उत्तराखंड से वैश्विक संदर्भ तक
वैश्विक तस्वीर: लोकतंत्र का आईना और उसकी दरारें रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) की 2024 की वर्ल्ड प्रेस फ़्रीडम इंडेक्स रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के कई लोकतांत्रिक देशों में भी…
भारतीय ज्ञान परंपरा : ह्रास, वर्तमान संकट और भविष्य की राह
भारत को प्राचीन काल से ही “ज्ञानभूमि” कहा गया है। यहाँ वेद, उपनिषद, महाभारत, रामायण जैसे महाकाव्यों से लेकर आयुर्वेद, ज्योतिष, योग, गणित, वास्तु और दर्शन तक अनेक शाखाएँ विकसित…
आठवां श्री माता भगवती का विशाल भंडारा और कन्या भोज हुआ
रविवार को आदर्श नगर शुक्लागंज उन्नाव में आठवां श्री माता भगवती का विशाल भंडारा और कन्या भोज का आयोजन हुआ। भंडारे में नगर के गणमान्य लोगों के अलावा सैकड़ो की…
क्या धन बल से आज समाज में मुद्दे तय हो रहे है?
क्या धन बल से आज समाज में मुद्दे तय हो रहे है? सांस्कृतिक पतन कोई एक दिन में नहीं होता इसमें बहुत लंबा समय लगता है और समाज व संस्कृति…

















