जयप्रकाश नारायण: लोकतंत्र की आत्मा और आज के भारत की चेतना

जयप्रकाश नारायण:जब भारत में राजनीति का अर्थ केवल सत्ता-संघर्ष तक सीमित हो गया है, तब जयप्रकाश नारायण का नाम हमें याद दिलाता है कि राजनीति का सबसे ऊँचा उद्देश्य समाज…

धरती पुत्र की विरासत: मुलायम सिंह से अखिलेश तक समाजवाद की बदलती परिभाषा”

मुलायम सिंह: उत्तर प्रदेश की राजनीति में “धरती पुत्र” कहे जाने वाले मुलायम सिंह यादव का नाम केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक युग का प्रतीक रहा है — वह…

ग्रामोदय से भारतोदय तक: नवाचार की नई परिभाषा गढ़ता ग्रामीण भारत

भारत के विकास की असली कहानी शहरों की चमक से नहीं, बल्कि गाँवों की मिट्टी से लिखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” अभियान और मुख्यमंत्री योगी…

कानपुर में स्कूटी धमाके ने मचाई हलचल: सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

कानपुर के मूलगंज इलाके में बुधवार शाम को एक ताजे विस्फोट ने शहर के बाज़ार को हिला दिया। दो स्कूटी में अचानक हुई जोरदार धमाका धमाका वहाँ पर अफरातफरी मचा…

कांशीराम: बहुजन चेतना के स्थापत्यकार

परिनिर्वाण दिवस विशेष: भारत की राजनीति में ऐसे कुछ ही नेता हुए हैं जिन्होंने अपने विचारों से वंचित समाजों को सत्ता के केंद्र तक पहुँचाने की ठोस रणनीति दी। कांशीराम…

महर्षि वाल्मीकि: आत्मपरिवर्तन के आदिकवि और आधुनिक युग के लिए प्रेरणा

अंधकार से आलोक की यात्रा भारतीय संस्कृति में महर्षि वाल्मीकि को “आदिकवि” कहा जाता है — क्योंकि उन्होंने शब्दों के माध्यम से पहली बार मानव आत्मा की यात्रा को चित्रित…

🌕 शरद पूर्णिमा 2025 : महत्व, पूजन-विधि और विशेषताएँ

आज (06 अक्टूबर 2025) शरद पूर्णिमा का पावन पर्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। इसे कोजागरी पूर्णिमा, रास पूर्णिमा और कुमार…

जहरीली कफ सिरप से बच्चों की मौतें बढ़ीं, देशभर में हड़कंप

देशभर में जहरीली कफ सिरप के कारण बच्चों की मौतों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 11 बच्चों की मौत और राजस्थान में…

भगत सिंह: श्रद्धा से विचार तक — संघ और भाजपा की दृष्टि से बलिदान का अर्थ

भगत सिंह: जब गोरे अंग्रेज़ चले जाएंगे, तो क्या काले अंग्रेज़ राज नहीं करेंगे?”— भगत सिंह का यह सवाल आज भी समय के पार गूंजता है। यह सवाल केवल औपनिवेशिक…

मौन नफ़रत: बुली कल्चर और समाज का दर्पण

आज के समाज में एक भयावह प्रवृत्ति ने अपनी जड़ें गहरी कर ली हैं — बुली कल्चर। यह केवल स्कूल या कॉलेज तक सीमित नहीं रहा; यह हमारे कार्यस्थलों, सोशल…